दिल्ली भारत की राजधानी है। जहाँ हर साल 15 अगस्त और 26 जनवरी को देश के प्रधानमंत्री तिरंगा फहराते हैं। जहाँ हमारे देश का संविधान बनाया गया है। जहाँ बड़ी–बड़ी मीटिंग होती हैं कि देश को कैसे चलाना है, व्यापार कैसे करना है? दिल्ली एक चमचमाता शहर है। पर इसी चमचमाते शहर में न जाने कितने मेहनतकश मजदूर दिन–रात मेहनत करते–करते भूख और गरीबी में दम तोड़ रहे हैं। जिन्दगी की जंग हार रहे हैं.....
मजदूर एकता पत्रिका- ९
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हमने तीन आशा वर्करों––रज्जो, रोशनी और सीता से बातचीत की जो मेरठ के प्यारेलाल अस्पताल में काम करती हैं। इन सबसे बात करके हमें अच्छा लगा क्योंकि वे खुशमिजाज और निडर हैं। वे बहुत मेहनती भी हैं। रज्जो और सीता की आर्थिक हालत ठीक नहीं है। इनके पति मजदूरी करते हैं, जबकि रोशनी की आर्थिक हालत थोड़ी ठीक है। उसके पति की प्रिंटिंग की दुकान है। इन तीनों में अच्छी यारी–दोस्ती है। उनके काम और समस्याओं आदि से सम्बन्धित जो बातचीत हमने की उसका कुछ हिस्सा हम यहाँ दे रहे हैं।